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हिमाचल ट्रिप प्लान: 7 दिन में शिमला-मनाली या 10 दिन में स्पीति सर्किट

By Ganesh ·

हिमाचल ट्रिप प्लान: 7 दिन में शिमला-मनाली या 10 दिन में स्पीति सर्किट

हिमाचल के दो प्लान: 7 दिन में शिमला, मनाली और कसोल या सिस्सू, जो साल के ज़्यादातर महीनों में चलता है; और जून से सितंबर के लिए 10 दिन का स्पीति सर्किट, शिमला से किन्नौर होते हुए काज़ा और कुंज़ुम ला से वापसी। सड़कें, ऊँचाई और मोटा खर्च।

हिमाचल में दो बिल्कुल अलग तरह की यात्राएँ होती हैं। शिमला और मनाली पहाड़ी शहर हैं: अच्छी सड़कें, हर जगह होटल और हर मौसम में कुछ न कुछ करने को। स्पीति पहाड़ों के उस पार तिब्बत की तरफ़ की ऊँची, सूखी घाटी है, जहाँ मठ, छोटे गाँव और लंबे सफ़र हैं। पहली बार जा रहे हैं या एक हफ़्ते की छुट्टी है तो शिमला-मनाली करें। जून से सितंबर के बीच दस दिन हों और साधारण ठहरने से परहेज़ न हो, तो स्पीति सर्किट।

पहला प्लान: 7 दिन में शिमला और मनाली

दिन कहाँ रात
1 कालका से शिमला टॉय ट्रेन (या चंडीगढ़ से गाड़ी) शिमला
2 मॉल रोड, जाखू मंदिर, क्राइस्ट चर्च, कुफ़री या मशोबरा शिमला
3 मंडी होते हुए मनाली (8 से 9 घंटे) मनाली
4 ओल्ड मनाली, हिडिंबा मंदिर, वशिष्ठ के गर्म कुंड मनाली
5 सोलंग घाटी और अटल टनल से सिस्सू मनाली
6 पार्वती घाटी में कसोल और मणिकरण, या नग्गर क़िला कसोल या मनाली
7 चंडीगढ़ वापसी या भुंतर (कुल्लू) से फ़्लाइट घर

कालका-शिमला रेलवे यूनेस्को की सूची में शामिल नैरो-गेज लाइन है। लगभग पाँच घंटे लगते हैं, जो धीमा है, इसलिए एक ही तरफ़ करें। 2020 में खुली अटल टनल से लाहौल (सिस्सू, केलांग) सर्दियों में भी मनाली से एक घंटे पर आ गया है, रोहतांग पार किए बिना। रोहतांग के लिए गाड़ियों को ऑनलाइन परमिट चाहिए; जाने से पहले आधिकारिक परमिट साइट देख लें।

दूसरा प्लान: 10 दिन में स्पीति सर्किट

दिन कहाँ रात
1 शिमला से सराहन या सांगला सांगला
2 छितकुल, तिब्बत सीमा के पास सड़क का आख़िरी गाँव सांगला
3 कल्पा, सेब के बाग़ और किन्नर कैलाश का नज़ारा कल्पा
4 नाको झील और ताबो मठ ताबो
5 धनकर मठ, फिर काज़ा काज़ा
6 की मठ, किब्बर, चिचम पुल काज़ा
7 लांगज़ा, हिक्किम (ऊँचाई वाला डाकघर), कोमिक काज़ा
8 कुंज़ुम ला पार करके चंद्रताल झील चंद्रताल कैंप
9 बातल और ग्राम्फू होते हुए मनाली मनाली
10 चंडीगढ़ या दिल्ली वापसी घर

किन्नौर से ऊपर जाना और कुंज़ुम ला से नीचे आना ही सही दिशा है। इससे ऊँचाई धीरे-धीरे बढ़ती है और शरीर को ढलने का समय मिलता है। काज़ा लगभग 3,800 मीटर पर है। कुंज़ुम ला और चंद्रताल की सड़क बर्फ़ के हिसाब से आमतौर पर जून से अक्टूबर तक खुली रहती है; बाकी समय किन्नौर से ही आना-जाना होता है।

ऊँचाई का ध्यान

  • शुरुआती रातें 3,000 मीटर से नीचे (सांगला, कल्पा) बिताएँ, फिर ऊपर जाएँ।
  • खूब पानी पिएँ, काज़ा के पहले दिनों में शराब से बचें और धीरे चलें।
  • सिरदर्द बढ़ता जाए, उल्टी हो या आराम करते हुए भी साँस फूले तो नीचे उतरें, आगे न बढ़ें।
  • दिल या फेफड़ों की कोई तकलीफ़ है तो जाने से पहले डॉक्टर से बात करें।

प्रति व्यक्ति मोटा खर्च

मद शिमला-मनाली, 7 दिन (₹, लगभग) स्पीति सर्किट, 10 दिन (₹, लगभग)
चंडीगढ़ या कालका तक आना-जाना 3,000-10,000 3,000-10,000
ड्राइवर के साथ गाड़ी (दो लोगों में) 12,000-17,000 22,000-30,000
ठहरना, दो लोग एक कमरे में 8,000-25,000 10,000-20,000
खाना, टिकट, गतिविधियाँ 5,000-10,000 6,000-10,000
कुल 28,000-62,000 41,000-70,000

स्पीति के लिए ऐसा ड्राइवर लें जो पहले वहाँ जा चुका हो। किन्नौर की सड़क में कई तंग, खुली ढलानों वाले हिस्से हैं और चंद्रताल के पास नालों को पार करने में अनुभव चाहिए।

कब जाएँ

शिमला और मनाली साल के ज़्यादातर महीनों में ठीक हैं। मार्च से जून सुहाना रहता है, और दिसंबर से फ़रवरी बर्फ़ (और वीकेंड पर सोलंग में जाम)। जुलाई-अगस्त से हो सके तो बचें: भारी बारिश से पूरे हिमाचल में भूस्खलन और सड़कें बंद होती हैं, और पिछले कुछ सालों में बाढ़ से पूरी घाटियाँ कट गई हैं। स्पीति के लिए जून से सितंबर सबसे अच्छा है; मुख्य पहाड़ों के पीछे होने से वहाँ बारिश कम होती है।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या सर्दियों में स्पीति खुला रहता है?

किन्नौर वाली सड़क से काज़ा आमतौर पर खुला रहता है, और जनवरी-फ़रवरी में विंटर ट्रिप भी होती हैं। पर ठंड बहुत ज़्यादा होती है, कई होमस्टे बंद रहते हैं, और किसी अनुभवी स्थानीय ऑपरेटर के साथ ही जाएँ।

क्या स्पीति के लिए परमिट चाहिए?

भारतीय नागरिकों को स्पीति सर्किट के लिए इनर लाइन परमिट नहीं चाहिए। विदेशियों को किन्नौर में सीमा के पास वाले हिस्से के लिए चाहिए।

फ़ोन चलेगा?

काज़ा और कुछ गाँवों में BSNL और जियो चलते हैं। सर्किट के बड़े हिस्से और चंद्रताल में बिल्कुल सिग्नल नहीं होता। घरवालों को प्लान बता दें और नकद रखें; काज़ा में ATM हैं, पर भरोसे लायक नहीं।

तस्वीर: Chitkul Kinnaur, Shivendujha, CC BY-SA 4.0 (Wikimedia Commons)

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