7 दिनों में केरल: कोच्चि, मुन्नार, थेक्कडी, बैकवॉटर्स और वर्कला
By Ganesh ·
ऐतिहासिक कोच्चि से मुन्नार के चाय बागानों, थेक्कडी के मसाला बागों और अलप्पुझा के बैकवॉटर्स होते हुए वर्कला की चट्टानों तक एक हफ़्ते का केरल सफ़र, साथ में मौसम, खाने और आने-जाने के सुझाव।
अरब सागर और पश्चिमी घाट के बीच फैली इस पतली-सी पट्टी में केरल ने हैरान कर देने वाली विविधता समेट रखी है। सिर्फ़ एक हफ़्ते में आप सदियों पुराने बंदरगाह शहर की गलियों में घूम सकते हैं, चाय बागानों के बीच रात बिता सकते हैं, मसालों के बाग देख सकते हैं, नारियल के पेड़ों से घिरी नहरों में नाव पर तैर सकते हैं और आख़िर में समुद्र किनारे की ऊँची चट्टानों पर सूर्यास्त देख सकते हैं। पहली बार केरल जाने वालों के लिए हमने यह आरामदेह सात दिन का रूट तैयार किया है।
कब जाएँ: मानसून या सूखा मौसम?
केरल में दो मानसून आते हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून आम तौर पर जून के आसपास पहुँचता है और लगभग सितंबर तक भारी बारिश लाता है; इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में छोटा उत्तर-पूर्व मानसून आता है। मोटे तौर पर दिसंबर से मार्च तक का सूखा मौसम सबसे लोकप्रिय है: आसमान साफ़ रहता है, पहाड़ों में मौसम सुहाना होता है और समुद्र तट के दिन भरोसेमंद होते हैं। अप्रैल-मई में तट पर गर्मी और उमस ज़्यादा होती है, हालाँकि पहाड़ ठंडे रहते हैं।
मानसून को नज़रअंदाज़ न करें। इस मौसम में हरियाली गहरी हो जाती है, झरने पूरे उफान पर होते हैं, भीड़ कम होती है, और कई आयुर्वेद केंद्र इसे उपचार का पारंपरिक मौसम मानते हैं। पहाड़ी सड़कों पर कुछ देरी हो सकती है और समुद्र उफनता रहता है, इसलिए तट पर टहलें, तैरने से बचें। अगस्त या सितंबर में जाएँ तो केरल का फ़सल उत्सव ओणम और बैकवॉटर्स की मशहूर स्नेक बोट रेस देखने का मौक़ा मिल सकता है।
7 दिनों का केरल यात्रा-क्रम
दिन 1: कोच्चि पहुँचें
कोच्चि हवाई अड्डे पर उतरकर फ़ोर्ट कोच्चि में ठहरें, जो पुर्तगाली, डच और ब्रिटिश व्यापारियों के असर से बना ऐतिहासिक इलाक़ा है। पहले दिन आराम करें: शाम को समुद्र किनारे टहलते हुए चीनी मछली पकड़ने के जाल देखें और छायादार गलियों में किसी कैफ़े में बैठें।
दिन 2: फ़ोर्ट कोच्चि और मट्टनचेरी
सुबह मट्टनचेरी घूमें: भित्ति-चित्रों वाला मट्टनचेरी पैलेस (जिसे डच पैलेस भी कहते हैं), ज्यू टाउन के मसाला गोदाम और एंटीक दुकानें, और परदेसी सिनेगॉग। शाम को कथकली देखें; कई जगहों पर जल्दी पहुँचकर कलाकारों का विस्तृत मेकअप होते हुए भी देखा जा सकता है।
दिन 3: मुन्नार की ओर
सड़क झरनों और मसालों की दुकानों से गुज़रती हुई पश्चिमी घाट में चढ़ती है, और फिर ढलानें लहराते चाय बागानों में बदल जाती हैं। सफ़र और रास्ते के पड़ावों के लिए लगभग पूरा दिन रखें। पहुँचकर स्वेटर निकालें और ठंडी हवा का आनंद लें।
दिन 4: मुन्नार
किसी चाय संग्रहालय या फ़ैक्टरी में देखें कि पत्ती से चाय कैसे बनती है, फिर बागानों में पैदल घूमें। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान नीलगिरि तहर का घर है, एक पहाड़ी बकरी जो केवल इसी क्षेत्र में मिलती है; उद्यान कुछ मौसमों में बंद रहता है, इसलिए जाने से पहले जाँच लें। शहर के आसपास के व्यूपॉइंट और बाँध आधे दिन की सैर के लिए अच्छे हैं।
दिन 5: थेक्कडी
दक्षिण की ओर थेक्कडी जाएँ, जो पेरियार टाइगर रिज़र्व का प्रवेश द्वार है। वन्यजीव दिखने की कोई गारंटी नहीं, पर पेरियार झील में नाव की सैर या गाइड के साथ प्रकृति-भ्रमण में अक्सर हाथी, गौर, हिरण और पक्षी दिख जाते हैं। इसके बाद किसी मसाला बागान में इलायची, काली मिर्च, दालचीनी और वनीला उगते हुए देखें।
दिन 6: अलप्पुझा के बैकवॉटर्स
पहाड़ों से उतरकर अलप्पुझा (एलेप्पी) पहुँचें और एक हाउसबोट पर सवार हों, जो धान ढोने वाली पारंपरिक नाव केट्टुवल्लम से बनाई जाती है। धान के खेतों, गाँव के घाटों और चर्चों के पास से गुज़रते हुए नाव का दल आपके लिए केरल का खाना पकाएगा। रात भर रुकना ज़्यादा लगे तो दिन की क्रूज़ या संकरी नहरों में छोटी डोंगी की सैर भी बढ़िया विकल्प है।
दिन 7: वर्कला
सफ़र वर्कला में ख़त्म करें, जहाँ लाल लेटराइट चट्टानें सीधे समुद्र तट तक उतरती हैं। चट्टानों के ऊपर बने रास्ते पर टहलें, अरब सागर पर सूर्यास्त देखें और पास के प्राचीन जनार्दन स्वामी मंदिर जाएँ। आगे की उड़ान के लिए तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा पास ही है।
समय कम हो तो थेक्कडी छोड़कर मुन्नार से सीधे अलप्पुझा जाएँ। समय ज़्यादा हो तो वेम्बनाड झील किनारे कुमारकम में एक रात जोड़ें या वर्कला में समुद्र तट के दिन बढ़ा लें।

क्या खाएँ
- सद्या: केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला शाकाहारी भोज, ख़ासकर ओणम पर।
- अप्पम और स्ट्यू: जालीदार चावल के पैनकेक के साथ नारियल के दूध वाली हल्की करी, केरल का क्लासिक नाश्ता।
- पुट्टु और कडला करी: भाप में पके चावल के बेलन और काले चने की करी।
- करीमीन पोल्लिचतु: केले के पत्ते में लपेटकर भुनी पर्ल स्पॉट मछली, बैकवॉटर्स की ख़ासियत।
- तीखी करी के साथ केरल पराठा, और नारियल के दूध में बनी फ़िश मोली।
- भरपूर नारियल पानी, केले के चिप्स और पहाड़ों में इलायची वाली चाय।
आना-जाना
पहाड़ी हिस्से के लिए ज़्यादातर यात्री ड्राइवर समेत कार किराये पर लेते हैं, क्योंकि मुन्नार और थेक्कडी के रास्ते घुमावदार हैं और सार्वजनिक परिवहन धीमा है। तट के साथ-साथ ट्रेनें कोच्चि, अलप्पुझा, वर्कला और तिरुवनंतपुरम को आसानी से जोड़ती हैं, और राज्य की बसें लगभग हर जगह पहुँचती हैं। छोटी दूरी के लिए ऑटो-रिक्शा आसान है; चलने से पहले किराया तय कर लें या मीटर चालू करवाएँ। नक्शे पर दूरियाँ कम दिखती हैं, पर पहाड़ी सड़कों में समय लगता है, इसलिए एक दिन में बहुत सारे पड़ाव न ठूँसें।
व्यावहारिक सुझाव
- समुद्र तटों के बाहर शालीन कपड़े पहनें, और मंदिरों, चर्चों व मस्जिदों में कंधे और घुटने ढकें। कुछ मंदिरों में केवल हिंदुओं को प्रवेश मिलता है; सूचना-पट्ट ध्यान से पढ़ें।
- घरों और पूजा-स्थलों में जाने से पहले जूते उतारें।
- मुन्नार के लिए गर्म कपड़े रखें, जहाँ शामें ठंडी हो सकती हैं; मानसून में बारिश का सामान भी।
- हाउसबोट केवल लाइसेंसशुदा और हाल की अच्छी समीक्षाओं वाले ऑपरेटरों से बुक करें, और सवार होने से पहले पक्का कर लें कि क्या-क्या शामिल है।
- उद्यानों और स्मारकों में जाने से पहले प्रवेश नियम, समय और मौसमी बंदी आधिकारिक स्रोतों पर जाँच लें।
- ख़ासकर शाम के समय बैकवॉटर्स के आसपास मच्छर-रोधी क्रीम लगाएँ।
- आयुर्वेद के लिए सड़क किनारे के स्पा के बजाय योग्य चिकित्सकों वाले प्रतिष्ठित केंद्र चुनें।
सञ्चारीज़ में प्लान करें
सञ्चारीज़ में एक ट्रिप बनाएँ और फ़ोर्ट कोच्चि से वर्कला तक इस रूट का हर पड़ाव उसके दिन में जोड़ें, ताकि पूरा हफ़्ता एक ही नक्शे पर दिखे। अपनी फ़्लाइट और होटल के कन्फ़र्मेशन ईमेल बुकिंग इनबॉक्स पर फ़ॉरवर्ड करें, वे अपने-आप सही दिनों पर पहुँच जाएँगे। फिर ट्रिप अपने हमसफ़रों के साथ शेयर करें, ताकि सबके सामने एक ही प्लान हो।
तस्वीरें: A kettuvallam houseboat on the Kerala backwaters, Kv Gopalakrishnan, CC BY 3.0 · Munnar town among the hills, Kondephy, CC BY-SA 4.0 · Periyar lake and forest, Thekkady, Wouter Hagens, Public domain · Varkala beach below the cliffs, Devender Goyal, CC BY-SA 4.0 · Houseboat on the backwaters near Alappuzha, Augustus Binu, CC BY-SA 3.0 (Wikimedia Commons)
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